Saturday, October 18, 2008

दीपावली तेरा आना मंगलमय हो........

दीपावली तेरा आना मंगलमय हो........दीपावली के दो दिन पूर्व मै घर के बहार शाम को बैठकर समाचार पत्र पढ़ रहा था!चाय की चुस्कियों के साथ इसका आनंद दुगुना हो रहा था !तभी मैंने कुछ शोर सुना !बच्चे दीपमालिका -दीपमालिका चिल्ला रहे थे,मैंने सोचा बच्चे झगडा कर रहे होगे !लेकिन देखा की दीपों से सजी सारे मुहल्ले को जगमग कर रही थी !चेहरे पर अलौकिक तेज ,राजसी वस्त्र पहने दीपमालिका मेरे घर की तरफ आ रही थी!मैंने कहा-दीपमालिके तेरा आना मंगलमय हो......!तुम्हे तो दो दिन पहले आना था,पहले कैसे आ गई?वह बोली-हमारे देश के नेता भी तो बिना बताये कही से कही पहुच जाते है!अब आडवाणी जी को ही देख लो जन कही हेलीकाप्टर रास्ता भटक गया सो लखनऊ पहुच गए,फिर मै क्यों नही भटक सकती हूँ?मैंने कहा-भगवान् राम पूरे चौदह वर्ष बनवास बिताकर वापिस अयोध्या लौटे थे तुमने एक साल पूरा नही बिताया और दो दिन पूर्व ही आ गई?उसने जवाब दिया अब लोग भगवान् राम को नही जानते है!अब करूणानिधि जी को ही देख लो कहते है राम एक शराबी था,क्या सबूत है की राम नाम का कोई व्यक्ति था ?अब भाई सबूत तो इस बात का भी नही है कि उनका कोई बाप या दादा था,खैर छोडो अब तो लोग फ़िल्म "मै हूँ ना "के मेजर राम शाहरुख़ खान को जानते है!कुछ दिनों में लोग राम कि कसम कि जगह अभिनेताओं कि कसम खायेगे!जैसे शाहरुख़ की कसम,अमिताभ की कसम,मिथुन दा की कसम वगैरह वगैरह.......राम भगवान् के रूप से तो कब के हट चुके है,अब तो वे चुनावी मुद्दा और राजनीति की सियासत का अंग बन चुके है,कभी राम मन्दिर,तो कभी रामसेतु!सभी दल राम के भरोसे राजनीति कर रहे है!राम का नाम लोग जाने या न जाने लेकिन इन राजनेताओं को जरूर जानेंगे!राम का नाम चमके या न चमके इनके कपड़े और राजनीति जरूर चमकना चाहिए!मैंने फिर पूछा -इस बार कौन कौन सी खुशियों kee सौगात लेकर आई हो?शेयर बाजार की की उठा पटक,कई बैंकों का दिवालियापन,जिनका पैसा डूब रहा है उनको हार्ट अटैक,तथा विधानसभा चुनाव में जो लोग जीतेंगे उनके लिए तो पूरा पांच साल का प्रीमियम बोंड है!चुनाव में थोड़ा खर्च करो और चुनाव जीतने के बाद पाँच साल तक ऐश!उनकी चार पीडी आराम से जिन्दगी काटेगी,जो हारेंगे उनको सत्ता से बेदखली और राम की तरह पाँच वर्ष का वनवास !लेकिन वे चुप नही बैठेंगे ,कहीं न कहीं से जुगाड़ लगा कर या तो संगठन में चले जायेंगे या दूसरे राज्य में!जैसे अपने दिग्गी राजा को देखो पिछले चुनाव में हार के बाद बोले की प्रदेश की सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेंगे, लेकिन देखो तो संगठन का पड़ संभाल रहे है!यू।पी.की कमान तो उनके पास है ही अब एम्. पी. में फिर से घुसपैठ कर रहे है!तभी पीछे से एक मंत्री जी आ गए!मंत्री जी बोले-महोदय,मैंने अपनी सरकार में जितना घोटाला किया हैउन सबकी ख़बर समाचार पत्र में नही छापनी चाहिए!इसके एवज में एक बण्डल मुझे पकडाने लगे !मैंने पूछा ये क्या है?बोले ख़ुद ही देख लो!पाँच-पाँच सौ के नोटों की गड्डियां थि१मैने हाथ जोड़कर कहा मंत्री जी मै ऐसा नही कर पाऊँगा,अब जनता को केवल मीडिया पर ही तो भरोसा है,मीडिया ही है जो भ्रष्टाचार,अन्याय को मिटा सकती है!मंत्री जी नाराज हो गए और मुझे उमा खुराना,आरुशी हत्या काण्ड में मीडिया की भुमिका बताते हुए चले गए!अंत में यह भी कहना नही भूले कि तुम्हे देख लेंगे!मंत्री जी के जाते ही दीपमालिके भी जाने लगी!अपने साथ जितनी रोशनी प्रकाश लायी थी,लेकर चलने लगी!मैंने कहा-तुम कहाँ चली?बोली इस युग में जहाँ भ्रष्टाचारी,चोरी,झूठ,फरेब है वहां मै हूँ,मेरा वास है,इमानदार,कर्मठ,लगनशील लोगों के यहाँ में नही रहती !यदि मुझे पाना है तो पहले ये सारे गुन अपने में लाओ,तब मै ख़ुद-ब-खुद्तुम्हारे पास आ जाऊंगी!वह चली गयी!मै कभी देख रहा था समाचारपत्र की ओर,कभी अपने पुराने फूटे मकान की ओर जिसकी दीवारें और छत जर्जर हालत में थी,कभी दीपमालिके की ओर,जिसके आने पर मैंने कहा था तेरा आना मंगलमय हो..........................

1 comment:

ambika said...

pata nahi kishan tumhare dimag me itna sab kahan se or kaise aata hai,or uske bad use shabdon k roop me vyakt karne ka tareeka bahut hi badhiya hai,tumhare dwara likhe lekh padhne me bahut hi achchha lagta hai, bhavishya me v isi tarah likhte rehana.