Monday, October 27, 2008

दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें


दीपावली की आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें

Tuesday, October 21, 2008

..........मगर सांवली सी

बहुत खुबसुरत मगर सांवली सी

मुझे अपने ख्वाबों की बाहों में पाकर
कभी नींद में मुस्कुराती तो होगी
उसी नींद में कसमसा-कसमसा कर
सिरहाने से तकिये गिराती तो होगी

वही ख्वाब दिन के मुंडेरों पे आके
उसे मन ही मन में लुभाते तो होंगे
कई साझ सीने की खामोशियों में
मेरी याद से झनझनाते तो होंगे
वो बेशाख्ता धीमें धीमें सुरों में
मेरी धुन में कुछ गुनगुनाती तो होगी

चलो खत लिखें जी में आता तो होगा
मगर उंगलियाँ कंपकपाती तो होगी
कलम हाथ से छुट जाता तो होगा
उमंगे कलम फिर उठाती तो होंगी
मेरा नाम अपनी किताबों पे लिखकर
वो दातों में उंगली दबाती तो होगी

जुबाँ से कभी अगर उफ् निकलती तो होगी
बदन धीमे धीमे सुलगता तो होगा
कहीं के कहीं पाँव पडते तो होंगे
जमीं पर दुपट्टा लटकता तो होगा
कभी सुबह को शाम कहती तो होगी
कभी रात को दिन बताती तो होगी

-अनाम

Monday, October 20, 2008

मनुष्य और कौवा

सैर करने गया मै
देखते ही देखते
चौराहे पर मर गया कौवा
कुचलकर किसी वाहन से
भीड़ इकट्ठी हो गई
हजारों कौवों की
कोलाहल हो गया
सारी सड़क पर
आगे कत्ल हो गया गली में
किसी इंसान का
देखते ही देखते
बंद हो गई सभी दुकानें
पता न लगा एक भी इन्सान का
सोचने लगा में भी,
क्या कीमत है इन्सान की
गायब हो जाते है
सभी मौत पर इन्सान की
गए सैर करने हम
राह नापते रहे
घर हमारा जल गया
लोग थे की दूर से तापते ही रहे !
-कृष्ण कुमार द्विवेदी

Saturday, October 18, 2008

प्रभु कितनों को कितनी बार माफ करेंगे!

प्रभु कितनों को कितनी बार माफ करेंगे!

-अनाम
जैसा कि हर शहर सिर्फ़ अपने निवासियों की नज़र में होता है अब तक रायपुर बेशर्म था सिर्फ़ रायपुर वालों के लिए। लेकिन इस घटना ने इसे अब राष्ट्रीय स्तर का बेशर्म बना दिया या कहें कि न केवल राष्ट्रीय स्तर बल्कि मानवता के स्तर पर भी। घटना इस तरह की पहले गुवाहाटी में भी हो चुकी है। गुवाहाटी की घटना का संदर्भ मुझे याद नही/मालूम नही। पर रायपुर की घटना का संदर्भ मुझे मालूम है।शहर के एक मोहल्ले के एक अपार्टमेंट में एक स्त्री अपने दुधमुंहे बच्चे और अपनी रिश्तेदार लड़कियों के साथ रहती है। स्त्री पहले पीटा एक्ट के तहत गिरफ्तार हो चुकी है पीटा एक्ट अर्थात ज़िस्मफरोशी का कारोबार। स्त्री का कथन है कि वह अब यह सब छोड़ चुकी है, मोहल्ले वालों का कहना है कि स्त्री के कारण मोहल्ले की आबो-हवा खराब होती जा रही है। वो ऐसे कि यह स्त्री अपने घर मे मौजूद अन्य दोनो लड़कियों/स्त्रियों के साथ बालकनी पर बैठकर आते-जाते लड़कों/पुरुषों को इशारेबाज़ी करती रहती हैं। मोहल्ले वालों के अनुसार उन लोगों ने इस बाबत कई बार पुलिस को खबर की लेकिन कोई कारवाई नही हुई।बताया जाता है कि एक अप्रैल की रात को भी ये महिलाएं अपनी बालकनी पर बैठकर नीचे सड़क पर आते-जाते लोगों को इशारेबाज़ी कर रही थीं। ऐसे ही एक युवक को इशारेबाज़ी कर उपर बुलाया गया। जब वह युवक उपर पहुंचा तो महिलाओंम और उनके साथी एक लड़के ने डरा-धमका कर उसे लूटना शुरु कर दिया गया। लड़के ने विरोध स्वरूप शोर मचाया और तब मोहल्ले वाले वहां पहुंचे।मोहल्ले वाले वहां पहुचें और उन्होने अपना खेल शुरु किया। मोहल्ले वालों का आक्रोश इतना ज्यादा था कि उन्होने इस महिला और उसके साथी पुरुष के साथ साथी महिलाओं को मारा-पीटा। इसके बाद अति यह हुई कि बचते हुए वह महिला नीचे सड़क पर आ गई, मोहल्ले के पुरुषों की आदिम प्रवृति ने उसका कुर्ता और अंदरूनी वस्त्र फाड़ डाले, महिला टॉपलेस हो कर अपने को बचाने रोती हुई सड़क पर भागती रही।मीडिया को खबर मिल चुकी थी,न्यूज़ फ्लैश होने लगा था,टीवी चैनल के कैमरे लग गए थे,लड़की टॉपलेस सड़क पर दौड़ती दिख रही थी, और दिख रही थी हम पुरुषों की आदिम प्रवृति टॉपलेस की गई सड़क पर दौड़ती एक ऐसी महिला के रूप में जो पहले कभी वेश्यावृति में संलग्न रही थी!!भीड़ का कोई तंत्र नही होता। नक्कारखाने मे तूती की आवाज़ का क्या असर होता है?ऐसे मौके पर किसी ने कपड़े फाड़े जाने का विरोध किया भी हो तो क्या किसी ने सुना होगा?पता नही मेरे पड़ोस में ऐसी महिलाएं रहने आए और उनकी ऐसी हरकतें जारी रहे बालकनी पर बैठकर इशारेबाज़ी करने वाली,तो मेरी क्या प्रतिक्रिया होगी तब। आप अपनी कहें………

ठीक-ठाक: कभी-कभी

ठीक-ठाक: कभी-कभी

दीपावली तेरा आना मंगलमय हो........

दीपावली तेरा आना मंगलमय हो........दीपावली के दो दिन पूर्व मै घर के बहार शाम को बैठकर समाचार पत्र पढ़ रहा था!चाय की चुस्कियों के साथ इसका आनंद दुगुना हो रहा था !तभी मैंने कुछ शोर सुना !बच्चे दीपमालिका -दीपमालिका चिल्ला रहे थे,मैंने सोचा बच्चे झगडा कर रहे होगे !लेकिन देखा की दीपों से सजी सारे मुहल्ले को जगमग कर रही थी !चेहरे पर अलौकिक तेज ,राजसी वस्त्र पहने दीपमालिका मेरे घर की तरफ आ रही थी!मैंने कहा-दीपमालिके तेरा आना मंगलमय हो......!तुम्हे तो दो दिन पहले आना था,पहले कैसे आ गई?वह बोली-हमारे देश के नेता भी तो बिना बताये कही से कही पहुच जाते है!अब आडवाणी जी को ही देख लो जन कही हेलीकाप्टर रास्ता भटक गया सो लखनऊ पहुच गए,फिर मै क्यों नही भटक सकती हूँ?मैंने कहा-भगवान् राम पूरे चौदह वर्ष बनवास बिताकर वापिस अयोध्या लौटे थे तुमने एक साल पूरा नही बिताया और दो दिन पूर्व ही आ गई?उसने जवाब दिया अब लोग भगवान् राम को नही जानते है!अब करूणानिधि जी को ही देख लो कहते है राम एक शराबी था,क्या सबूत है की राम नाम का कोई व्यक्ति था ?अब भाई सबूत तो इस बात का भी नही है कि उनका कोई बाप या दादा था,खैर छोडो अब तो लोग फ़िल्म "मै हूँ ना "के मेजर राम शाहरुख़ खान को जानते है!कुछ दिनों में लोग राम कि कसम कि जगह अभिनेताओं कि कसम खायेगे!जैसे शाहरुख़ की कसम,अमिताभ की कसम,मिथुन दा की कसम वगैरह वगैरह.......राम भगवान् के रूप से तो कब के हट चुके है,अब तो वे चुनावी मुद्दा और राजनीति की सियासत का अंग बन चुके है,कभी राम मन्दिर,तो कभी रामसेतु!सभी दल राम के भरोसे राजनीति कर रहे है!राम का नाम लोग जाने या न जाने लेकिन इन राजनेताओं को जरूर जानेंगे!राम का नाम चमके या न चमके इनके कपड़े और राजनीति जरूर चमकना चाहिए!मैंने फिर पूछा -इस बार कौन कौन सी खुशियों kee सौगात लेकर आई हो?शेयर बाजार की की उठा पटक,कई बैंकों का दिवालियापन,जिनका पैसा डूब रहा है उनको हार्ट अटैक,तथा विधानसभा चुनाव में जो लोग जीतेंगे उनके लिए तो पूरा पांच साल का प्रीमियम बोंड है!चुनाव में थोड़ा खर्च करो और चुनाव जीतने के बाद पाँच साल तक ऐश!उनकी चार पीडी आराम से जिन्दगी काटेगी,जो हारेंगे उनको सत्ता से बेदखली और राम की तरह पाँच वर्ष का वनवास !लेकिन वे चुप नही बैठेंगे ,कहीं न कहीं से जुगाड़ लगा कर या तो संगठन में चले जायेंगे या दूसरे राज्य में!जैसे अपने दिग्गी राजा को देखो पिछले चुनाव में हार के बाद बोले की प्रदेश की सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेंगे, लेकिन देखो तो संगठन का पड़ संभाल रहे है!यू।पी.की कमान तो उनके पास है ही अब एम्. पी. में फिर से घुसपैठ कर रहे है!तभी पीछे से एक मंत्री जी आ गए!मंत्री जी बोले-महोदय,मैंने अपनी सरकार में जितना घोटाला किया हैउन सबकी ख़बर समाचार पत्र में नही छापनी चाहिए!इसके एवज में एक बण्डल मुझे पकडाने लगे !मैंने पूछा ये क्या है?बोले ख़ुद ही देख लो!पाँच-पाँच सौ के नोटों की गड्डियां थि१मैने हाथ जोड़कर कहा मंत्री जी मै ऐसा नही कर पाऊँगा,अब जनता को केवल मीडिया पर ही तो भरोसा है,मीडिया ही है जो भ्रष्टाचार,अन्याय को मिटा सकती है!मंत्री जी नाराज हो गए और मुझे उमा खुराना,आरुशी हत्या काण्ड में मीडिया की भुमिका बताते हुए चले गए!अंत में यह भी कहना नही भूले कि तुम्हे देख लेंगे!मंत्री जी के जाते ही दीपमालिके भी जाने लगी!अपने साथ जितनी रोशनी प्रकाश लायी थी,लेकर चलने लगी!मैंने कहा-तुम कहाँ चली?बोली इस युग में जहाँ भ्रष्टाचारी,चोरी,झूठ,फरेब है वहां मै हूँ,मेरा वास है,इमानदार,कर्मठ,लगनशील लोगों के यहाँ में नही रहती !यदि मुझे पाना है तो पहले ये सारे गुन अपने में लाओ,तब मै ख़ुद-ब-खुद्तुम्हारे पास आ जाऊंगी!वह चली गयी!मै कभी देख रहा था समाचारपत्र की ओर,कभी अपने पुराने फूटे मकान की ओर जिसकी दीवारें और छत जर्जर हालत में थी,कभी दीपमालिके की ओर,जिसके आने पर मैंने कहा था तेरा आना मंगलमय हो..........................

Friday, October 17, 2008

पूंजीवाद

पूंजीवाद
-अनाम




बंदरवाला
हाथ नचा-नचाकर
बजाए जा रहा था डमरू
डिग-डिग, डम-डम
उछलता-कूदता, पीछे-पीछे
बच्चों का मस्तमौला झुंड !

दिखी अट्टालिका सामने
डाल दी पोटली
लगा जोर-जोर से बजाने
डिम-डिम डमरू
गाने लगा साथ-साथ
नाच मेरी बुलबुल..!

होने लगी
चवन्नी-अठन्नी की
पतझड़-सी बारिश
हनुमान जी समझकर
खिलाने लगे लोग बंदर को
केले-रोटी ।

भांति-भांति के करतब
दिखाए जा रहा था बंदर
बढ़ने लगी भीड़ धीरे-धीरे
एक क्षण के लिए रुका बंदर
पतली छड़ी पड़ी उस पर
सटाक…..!

बेचारे बंदर ने दृष्टि डाली
पहले अपने मालिक पर
फिर सिक्कों पर
नम हो गईं उसकी आंखें
शायद समझ गया था वह
पूंजीवाद का अर्थ..!